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Pt.Dhirendra kumar  Tiwari

Pt.Dhirendra kumar Tiwari

Monkvyasa Astrologer 11th March 2017

एक ज्योतिषी के तौर पर हमे सबसे ज्यादा दो ही प्रश्नों से दोचार होना पड़ता है -कैरियर और विवाह । शायद ही कोई इस अनंत आत्मिक यात्रा की अन्य सच्चाईयों- तत्त्व ज्ञान और निर्भरा भक्ति के बारे में जानना चाहता है। जबकि वास्तविक सच्चाई तो ईश्वर ही हैं जगत तो बस मिथ्या है। "उमा कहऊँ मैं अनुभव अपना,सत हरि भजन जगत सब सपना" (श्रीरामचरितमानस,गोस्वामी तुलसीदास)। खैर...इस सच्चाई तक तो कोई बिरला ही पहुँच पाता है। और ज्योतिष में प्रेम को विश्लेषण करने का तरीका ही अलग है । आप भौतिक प्रेम से जिसमें तमाम सांसारिक वस्तुओं सहित पत्नि और प्रेमिका तक आती है, क्षणिक सुख तो प्राप्त कर सकते हैं लेकिन चिरंतन सुख और परमानंद की प्राप्ति तो गोविन्द कि ओर उन्मुख होने से ही होता है। यहाँ गोविन्द से आशय आप किसी भी इष्ट जिनको आप मानते हों से ले सकते हैं।...अस्तु

      इस रहस्यमय जीवन की तरह व्यक्ति का कर्म क्षेत्र भी अत्यंत रहस्यमय है। कोई आठवीं पास व्यक्ति भी साहित्य का महाकवि बन जाता है( सूर्यकांत त्रिपाठी निराला) और कोई साहित्य का उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति भी जीवन में कोई उल्लेखनीय साहित्यिक रचना नहीं कर पाता। कोई कम पढा लिखा व्यक्ति भी विलक्षण तकनीकी योग्यताओं से युक्त पाया जाता है तो विज्ञान के आद्योपांत विद्यार्थी की भी तकनीकी समझ नगण्य होती है। कोई प्रारंभिक कक्षाओं तक पढा लिखा व्यक्ति भी बड़ा व्यापारी बन जाता है और उच्च शिक्षण संस्थान से बिजनेस मैनेजमेंट में डिग्री लेनेवाले भी उसके यहाँ नौकरी करते पाए जाते हैं। और इस लोकतंत्र में तो कभी - कभी कम पढे लिखे लोगों के उच्च पदों पर दर्शन हो ही जाते हैं। ये सभी कर्म के रहस्य हैं जिन्हे ज्योतिष के माध्यम से भलि-भांति जाना जा सकता है।

          लग्न कुंडली के लग्न,पंचम,द्वितिय,दशम और चतुर्थ भाव के सम्पूर्ण विश्लेषण से जातक के कार्यक्षेत्र की संपूर्ण बारीकियों को समझा जा सकता। पंचम भाव का संबंध व्यक्ति के रूचियों और रूझान से है जो व्यक्ति जन्म से प्राप्त करता है। अब इन रूचियों को वह कितनी तन्मयता से निभाकर अपनी मानसिक चेतना का भाग बना पाता है इसका संबंध चतुर्थ भाव से है । द्वितीय भाव उच्च शिक्षा का है। इन तीनो भावों का दशम और लग्न से सकारात्मक संबंध होने पर ही व्यक्ति अध्ययन और कैरियर में तालमेल बिठाकर सफलता की ओर बढ पाता है।

1.सूर्य का कारतत्त्व सरकारी सेवाओं के साथ चिकित्सा सेवा से भी है । क्योंकि सूर्य का आशय जीवन है और जिस पेशे का जुड़ाव जीवन से सीधे-सीधे हो वे सूर्य के क्षेत्र में आते हैं।

2.चन्द्रमा का आशय मानसिक दशा है और वे प्रोफेशन जिनमें मानसिक दशा का विशेष उपयोग है जैसे कलाकार,लेखक आदि वे चंद्रमा के ही कारतत्त्व हैं।

3.मंगल सेनापति हैं अतः वो पेशा जहां लड़ना है और निर्णय लेना है जैसे पुलिस और सेना वो मंगल के क्षेत्राधिकार में आते हैं।

4.बुध वणिक और वाणी के कारक ग्रह हैं। तो उन रोजगार से इनका संबंध है जहां वाणी का उपयोग है।

5.गुरू ज्ञान के अधिकारी हैं अतः वे पेशे जिसमें ज्ञान के विस्तार की हर पल गुंजाइश है जैसे लेखन,अध्यापन वे गुरू के ही कारतत्त्व हैं।

6.शनि मेहनत और मजदूरों के प्रतिनिधित्व करनेवाले हैं। अतः शनि से प्रभावित कार्यक्षेत्र श्रमसाध्य होता है। वैसे शनि तकनीकी और लौह से जुड़े पेशे के भी कारक ग्रह हैं।

7. शुक्र में अद्भुत आकर्षण है और ग्लैमर से जुड़े सारे प्रोफेसन गायन,वादन और नृत्य इसी के क्षेत्राधिकार में आते हैं।

ये ज्योतिष के ज्ञान नहासागर की सामान्य बाते हैं। वैसे कैरियर निर्णय एक जटिल विषय है जिसके विविध आयामों को जियोतिष के माध्यम से भलि- भांति जाना जा सकता है ।